दिल्ली की सड्को मे नाले ,या नाले मे सड़क
सुबह सुबह जब काले बादल , आसमां में छाने लगे ,
आसमानी बिजली के दहाड़, देर तक सोने वालो को जगाने लगे ,हवा के झोकों ने खिड़की दरवाजों को हिलोर दिया , फिर पानी के बुँदों ने अपनी सारी कसक निचोड़ दिया ,
आसमानी बिजली के दहाड़, देर तक सोने वालो को जगाने लगे ,हवा के झोकों ने खिड़की दरवाजों को हिलोर दिया , फिर पानी के बुँदों ने अपनी सारी कसक निचोड़ दिया ,
अँगड़ाई लेते हुए अपने बालकनी पर जाने लगा ,
बारिश के बूँदों के संग मन अपना बहलाने लगा ,
बालकनी से सुन्दर नजारा अंतर्मन को भाता रहा , वर्षा देवी के इस ममता से घर का याद आता रहा ,
घर की आँगन , खेतों की हरियाली ,जब आँखों में छाने लगी
आँखे नम होने से पहले कोचिंग की याद आने लगी ,
कोचिंग के उस भुत ने ,खुशनुमा यादों पर हथौड़ा जो चला दिया ,
नहा धोकर ,सूट बूट में ,कोचिंग की ओर कदम बढ़ा दिया
थोड़े समय के बारिश से नाले भी सर उठाने लगे
चुन चुनकर दिल्ली की हर रोड को समुन्दर जो बनाने लगे
कोचिंग छोड़ , वापस लौटने मन भी ललचाने लगा,
भारी भरकम लक्ष्य मेरा , पैरो में धक्का लगाने लगा
बारिश के बूँदों के संग मन अपना बहलाने लगा ,
बालकनी से सुन्दर नजारा अंतर्मन को भाता रहा , वर्षा देवी के इस ममता से घर का याद आता रहा ,
घर की आँगन , खेतों की हरियाली ,जब आँखों में छाने लगी
आँखे नम होने से पहले कोचिंग की याद आने लगी ,
कोचिंग के उस भुत ने ,खुशनुमा यादों पर हथौड़ा जो चला दिया ,
नहा धोकर ,सूट बूट में ,कोचिंग की ओर कदम बढ़ा दिया
थोड़े समय के बारिश से नाले भी सर उठाने लगे
चुन चुनकर दिल्ली की हर रोड को समुन्दर जो बनाने लगे
कोचिंग छोड़ , वापस लौटने मन भी ललचाने लगा,
भारी भरकम लक्ष्य मेरा , पैरो में धक्का लगाने लगा
घुटनो तक बहते पानी ,नदियों का एहसास दिलाने लगी
वाह री ! दिल्ली तेरी किस्मत ,अब नदियां- नाले भी रोड पर आने लगी
वाह री ! दिल्ली तेरी किस्मत ,अब नदियां- नाले भी रोड पर आने लगी
दिल्ली की सड्को मे नाले ,या नाले मे सड़क
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