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जाने IAS मे सफल होने की असली रणनीति

 

नमस्ते दोस्तों ,
जैसा की मैंने अपने पिछले पोस्ट मे वादा किया था ,कुछ सफल बुद्धिजीवियों से  प्राप्त अपने अनुभव को आपके साथ  साझा करने का  । इसी कड़ी मे चलिए आज देश के सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा UPSC की तैयारी के बारे मे जानते और समझते  हैं ।  वर्तमान समय मे यह देश के अधिकांश  विद्यार्थियों के स्वर्णिम सपनों के रूप मे एक राष्ट्रीय अभिरुचि का विषय सा हो गया है ,सच्चे लगन और कड़ी मेहनत से इसकी तैयारी करने वालों की भी  कोई कमी नहीं है ,लेकिन कहीं न कहीं सही समय पर  सटीक मार्गदर्शन और संसाधन के उचित प्रयोग के ज्ञान  के अभाव मे यह बहुत बड़ी चुनौती के रूप मे भी सामने आता  है और मन मे कुछ बुनयादी सावलों के बौछार कर जाता  है, कि  आखिर क्या हो रणनीति IAS बनने के लिए ? क्या पढ़ें ?कैसे पढे ?कितना पढ़ें ?
इत्यादि जैसे ढेरो सवालों के जवाब ढूंढते हुए एक साफ तस्वीर बनाने कि कोशिश करते हैं -

आप जिस ओर अपने द्र्ढ  संकल्पित व साहसिक कदम बढ़ा रहे हैं या बढ़ा चूकें हैं यह अपने आप मे आपकी पहली जीत है । सबसे पहले आपको यह जान लेना आवश्यक है कि किसी भी चीज मे विजयी होने की सम्पूर्ण शक्ति आप मे स्वयं मे समाहित है और अपने इसी शक्ति का उपयोग करते हुए आपको अपने इस बढ़ते कदम को उसकी मंजिल तक पहुंचानी होगी । आपके रास्तों को सरल बनाने के क्रम में तीन चरणों के साथ  आगे बढ़ते हैं ----

1 ॰ खुद को जानें , क्या आप मे वह है ? 


बड़ा सपना देखने से पहले हर किसी को अपनी क्षमताओं और कमजोरियों का वास्तविक विश्लेषण कर लेना चाहिए ।
जिसे तकनीकी रूप मे हम SWOT विश्लेषण के नाम से जानते हैं
S = STRENGTHS ( सामर्थ्य )
W = WEAKNESSES ( कमजोरियाँ )
O = OPPORTUNITIES ( अवसर )
T = THREATS ( खतरा )

शक्ति और कमजोरी हमारे आंतरिक रूप पर निर्भर हैं ,जबकि अवसर और खतरा बाह्य परिस्थितियों पर निर्भर होते हैं ।
सामर्थ्य के संबंध मे आप कुछ निम्न बातों को ले सकते हैं
-> कुछ विद्यार्थी पहले से अपने जीवन मे अच्छा प्रदर्शन करते हुए होनहार होते हैं
-> कठिन परिश्रमी होते हैं
->याद करने की क्षमता अच्छी होने के साथ साथ याददाश्त भी अच्छी होती है
-> अच्छे हस्तलेखन के साथ साथ देर तक पढ़ने मे भी सक्षम होते हैं
निश्चित ही ये आपके लिए प्रभावकारी साबित हो सकते हैं लेकिन बिल्कुल ऐसा भी नहीं है की इन सभी योग्यताओं के साथ आपकी सफलता सुनिश्चित हो जाती है आप अन्य कारको ( अपने कमजोरियों ) को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते जैसे -
->आप विषय को याद करने मे तो माहिर हैं लेकिन विश्लेषण क्षमता बहुत ही कम है
->आप कठिन परिश्रमी तो हैं लेकिन UPSC जैसे विस्तृत पाठ्यक्रम का अध्ययन नहीं कर सकते
->कोई उपरोक्त सभी  चीजों मे अच्छा है लेकिन उसका लेखन कौशल अच्छा नहीं है
->पढ़ाई के वक्त एकाग्रता की कमी है आदि आदि
सबकी अपनी सामर्थ्यता और कमजोरियाँ होती हैं उचित एवं  कठिन परिश्रम से सदैव अपने सामर्थ्यता को बढ़ाने तथा कमजोरियों को दूर करने हेतु प्रयासरत रहना चाहिए
उसी प्रकार आपके जीवन मे अनेक प्रकार के अवसर आते हैं आपको स्वयं को पहचान कर प्राप्त अवसर का लाभ उठाना चाहिए
अब रही बात खतरे की तो यह परीक्षा मे सफल होने की अनिश्चितता से लेकर ,विशेष वर्ष मे प्रश्नो के कठिन आ जाने ,प्रश्न उन्ही खंडो से आ जाने जिसमे आपकी तैयारी कमजोर रही हो ,या तैयारी के दौरान आपके स्वास्थ्य से लेकर अन्य कोई पारिवारिक समस्याओं का खतरा आदि
न तो कोई जन्मजात विद्वान पैदा होता है न ही कमजोर इसलिए स्वयं को पहचान कर ही सही  निर्णय करना चाहिए ,किसी के दबाव मे आकार निर्णय लेने से बचें और वही चुने जहां आपको जाना है ।
दोस्तों UPSC अपने खास अंदाज  UnPredictable Public  Service Commision के रूप मे खुद मे अपने विशाल पाठ्यक्रम और लगभग 10 लाख से ज्यादा प्रतिस्पर्धियों के साथ पूरे वर्ष चलने वाला प्रतियोगी परीक्षा है  ।  इसलिए एक या दो करियर विकल्प के साथ ही  तैयारी शुरू करनी चाहिए


2॰  UPSC को जाने - 


 सिविल सेवा परीक्षा मे हर साल लगभग 1 हज़ार पद हेतु 10 लाख लोग आवेदन करते हैं और इनमे से 5 लाख अभ्यर्थी प्रारम्भिक परीक्षा मे सम्मिलित होते हैं जिनमे से केवल 15000 अभ्यर्थियों को ही मुख्य परीक्षा देने का मौका मिलता है अतः मात्र 3000 लोग ही अंतिम रूप से साक्षात्कार हेतु बुलाए जाते हैं और उनमे से 1000 चयनित किए जाते हैं । इस परीक्षा मे इतनी कम सफलता दर के बावजूद यह  अभ्यर्थियों को भाग लेने के लिए प्रेरित करती है  । 
UPSC प्रत्येक अभ्यर्थी मे बुद्धिमता और संतुलित व्यक्तित्व के अतिरिक्त व्यावहारिक ज्ञान और विश्लेषणात्मक कौशल को भी देखना चाहता है । कुछ अन्य आवश्यक योग्यताएँ जैसे 
नैतिक ,मुद्दो की गहराई से समझ ,स्पष्ट प्रभावी और तार्किक अभिव्यक्ति ,नेतृत्व क्षमता ,सकारात्मक सोच आदि 
A ) परीक्षा के संरचना को समझे - 
इसके लिए UPSC के आधिकारिक विज्ञापन का पूर्ण रूप से सावधानीपूर्वक अध्ययन करना चाहिए ,परीक्षा संबंधी पात्रता ,शैक्षिक योग्यता ,आयु सीमा ,अवसरों की सीमा ,परीक्षा की योजना ,नई परीक्षा प्रणाली के बारे मे,आवेदन करने संबन्धित प्रक्रिया का अध्ययन इत्यादि से अवगत होना चाहिए । 

B ) पाठ्यक्रम का विश्लेषण 

सिविल सेवा परीक्षा की  तैयारी से पहले उसके  प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा के पूरे पाठ्यक्रम का विश्लेषण पूर्ण रूप से करना चाहिए  । क्योंकि अभ्यर्थियों की प्रायः पुस्तक के प्रथम अध्याय के प्रथम शब्द से शुरू करते हुए आगे बढ्ने की प्रवृति  होती है जो UPSC तैयारी के दृष्टिगत बिल्कुल भी उचित नहीं कही जा सकती । पाठ्यक्रम के विभिन्न टॉपिक का विश्लेषण करते हुए उनके परस्परिक महत्व को समझते हुए एवं परीक्षा मे ज़्यादातर पुछे जाने वाले टोपिक्स को वरीयता के आधार उन पर अधिक ध्यान केन्द्रित तैयारी करना चाहिए। 

प्रत्येक विषय के सभी टॉपिक समान रूप से महत्वपूर्ण नहीं होते । जितना अधिक से अधिक हो सके ,विषय से संबन्धित समस्त टॉपिक को पढ़ना चाहिए ,लेकिन परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण टॉपिक पर विशेष ध्यान देना चाहिए  

C ) पुराने प्रश्न पत्रों का विश्लेषण 

पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र विश्लेषण ,अभ्यर्थियों को पुछे जाने वाले प्रश्नो की समझ और प्रत्येक विषय का परीक्षा मे क्या अनुपात है ,इसके लिए सामर्थ्यवान बनाता है । प्रश्नो की प्रकृति और गहराई की समझ विकसित होती है ,जो आपको संपूर्णता मे पढ़ने के लिए प्रेरित करती है । प्रश्न पत्रों के अध्ययन से ही पाठ्यक्रम के विश्लेषण मे सहायता मिलती है । 

D ) अध्ययन के संसाधनो का विश्लेषण 

पाठ्यक्रम के गहन विश्लेषण ,प्रश्न पत्र के विश्लेषण के पश्चात उससे संबन्धित अध्ययन सामाग्री एवं अन्य स्रोतों का भी व्यवस्थित प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए । बहुत अधिक व्यर्थ के अध्ययन सामाग्री इकठ्ठा करने से बचना चाहिए एवं सटीक सीमित सामग्रियों से अवधारनाओ को मजबूत करने को प्राथमिकता देनी चाहिए । विषय की समग्र समझ के बाद ही उससे संबन्धित अन्य किताबों को अपना ज्ञान संवर्धन हेतु उपयोग मे लाया जा सकता है । 

3॰तैयारी के दाँव-पेंच  

"जितनी बड़ी बाधा होगी उसे पार करने का गौरव उतना ही ज्यादा होगा "

a  ) दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति 

दृन्ध संकल्प और मजबूत इच्छाशक्ति का होना सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए एक बहुत  ही आवश्यक गुण है । आपको यह जान लेना आवश्यक हो जाता है कि  तैयारी की यह यात्रा बिल्कुल भी आसान नहीं है इसके लिए आपको शुरुआत से अंत तक उसी जुनून से डटे रहना होगा । आप इस सेवा मे शामिल क्यो होना चाहते हैं ,क्या हासिल करना चाहते हैं ? केवल आपके माता - पिता के सपने को पूरा करने कि चाहत  इस यात्रा के अंत तक सफलता पूर्वक पहुचने कि लिए पर्याप्त नहीं हो सकता इसके लिए आपके स्वयं के अंदर वह प्यास जागृत होनी चाहिए । 

b ) अच्छे मार्गदर्शक चूनना 
अपने तैयारी के शुरुआत मे आपको तेजी से बिना भ्रमित हुए आगे बढ्ने कि लिए  मार्गदर्शक कि आवश्यकता होगी ,लेकिन आँख बंद करके किसी भी मुखर्जी नगर के "बाबा" जैसे लोगो ( सीनियर प्रतियोगी ) जिन्होने  कभी प्रारम्भिक परीक्षा भी  नहीं निकाला हो उनसे बचने कि आवश्यकता है । क्योकि  इनसे  आपको भ्रमित होने कि ज्यादा संभावनाएं बनी रहेगी । इस बाबा वाणी के रूप मे आपको अनेक भ्रमित करने वाले प्रवचनों से बचने कि आवश्यकता होगी  जिसकी वास्तविकता से कोई  लेना देना नहीं  होता है इसलिए ऐसे किसी मार्गदर्शक को चुनिए जो पहले से इन  सेवा क्षेत्रों मे कार्यरत हों  या कम से कम इंटरव्यू तक सफलता पूर्वक पहुचने का   अनुभव रखते हो । 

c ) कोचिंग की भूमिका 

यह  अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़े असमंजस का विषय होता है कि किसी कोचिंग संस्था का सहारा लेना ज्यादा अच्छा और लाभदायक रहेगा या खुद से तैयारी करना ? इसका सबसे अच्छा जवाब यह है कि आपको सफल होने के लिए "सलाह  और मार्गदर्शन " कि अति आवश्यकता होगी  । यदि आपके नजदीक  कोई अच्छा मार्गदर्शक जो आपको इस परीक्षा के लिए सही दिशा दे पाए उपलब्ध हो तो मेरा सलाह यही रहेगा कि आपको खुद से तैयारी करनी चाहिए परंतु यदि आपके आसपास ऐसा कोई भी न हो जो इस परीक्षा मे सफलता पूर्वक शामिल हुआ हो और आपको मार्गदर्शन उपलब्ध करा पाए तब आपको निश्चित रूप से कोचिंग संस्था वाला विकल्प चुनने मे संकोच नहीं करना चाहिए । तब प्रख्यात कोचिंग संस्था जहां उचित कोर्स का संचालन हो ,जहां उच्च गुणवत्ता के अध्ययन सामाग्री उपलब्ध हो ,अच्छे शिक्षक हों ,अच्छे प्रतिस्पर्धा के वातावरण हो का चयन करना चाहिए । 

d ) विषयों कि बुनियादी अवधारणाओं का विकास

जब हम किसी घर का निर्माण कर रहे होते हैं तो  उसके नीव की  मजबूती पर विशेष ध्यान देते हैं  ठीक उसी प्रकार UPSC  के तैयारी मे इसको  मजबूत आधार प्रदान करने हेतु विषयों के बुनियादी अवधारनाओ के विकास  लिए फिर से स्कूल स्तर के किताबों की सहायता लेना पड़ता है जिसके लिए NCERT सर्वश्रेष्ठ विकलप के रूप मे उपलब्ध होता है । इसलिए आधार के रूप मे अध्ययन NCERT से ही करना चाहिए । 
e) पाठ्यक्रम को याद करना 
अपने प्रारम्भिक परीक्षा ,मुख्य परीक्षा से लेकर वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम को याद कर लेना चाहिए । किसी भी विषय मे नया टॉपिक के अध्ययन से पहले उससे संबन्धित पाठ्यक्रम का विश्लेषण कर लेना चाहिए । इससे आपके दीमाक मे आपके लक्ष्य का साफ तस्वीर बनेगा और अध्ययन मे सहायक सिद्ध होगा । 

 f) पुराने प्रश्न पत्रों से  अभ्यास 

पाठ्यक्रम विश्लेषण के पश्चात विषय से संबन्धित पुराने वर्षों के प्रश्नो का अध्ययन करना चाहिए । और पाठ्यक्रम एवं प्रश्नो को ही आधार मानकर अध्ययन करना चाहिए 

 g ) वैकल्पिक विषय का चयन 

यह भी अभ्यर्थियों मे दुविधा का एक कारण एवं सफलता का एक मजबूत पक्ष है इसलिए इसके निर्धारण मे अत्यधिक सावधानी बरतनी  चाहिए । 
इसका निर्णय स्वयं आपको विभिन्न बिन्दुओं को ध्यान मे रखते हुए करना चाहिए 
1 मजबूत पृष्ठभूमि - सबसे पहले आपको अपने  मजबूत स्नातक पृष्ठभूमि को प्राथमिकता देनी चाहिए । 
2 उच्च गुणवततायुक्त  मार्गदर्शन की उपलब्धता - संबन्धित विषय मे मार्गदर्शन की उपलब्धता को भी नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए
3 गुणवत्ता पूर्ण अध्ययन सामाग्री की उपलब्धता 
4 सामान्य अध्ययन( मुख्य परीक्षा) से अधिक संबद्धता को भी ध्यान रखना चाहिए ताकि सीमित समय मे तैयारी करने मे आसानी हो 
5  स्वयं की रुचि के आधार पर

चयन के कुछ गलत आधार जो समान्यतः देखे जाते हैं -
1 क्योंकि पाठ्यक्रम छोटा दिख रहा है
2 क्योंकि इसमे अभ्यर्थियों के ज्यादा नंबर आते रहे हैं
3 क्योकि हिन्दी माध्यम वाले सभी यही विषय चुनते हैं
4 क्योंकि पिछले 3 साल से किसी विषय मे अभ्यर्थियों को ज्यादा नंबर मील रहे हों जरूरी नहीं 4था साल भी वैसा ही हो
5 क्योंकि मेरे सभी सीनियर और परम मित्रों ने यह विषय लिया है
6 क्योंकि आपके बैच की सुंदर लड़की ने वह विषय चुन रखा है
7 क्योंकि आपको कोचिंग सेंटर मे काउन्सलर ने चने के झाड पर चढ़ा दिया हों
8 क्योंकि आप इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं ।
आपको सभी सलाह को भले सुनना चाहिए लेकिन अंत मे निर्णय स्वयं के आधार पर ही लेना चाहिए ,थोड़ा व्यावहारिक होकर ही सोचें भावनात्मक या मात्र मनोवैज्ञानिक पर अत्यधिक निर्भरता नहीं रखनी चाहिए ।

जैसे यदि आपने अपना स्नातक मैकानिकल इंजीनियरिंग से किया है और उसमे आपकी मजबूत पकड़ है  तो सिविल सेवा के मैकानिकल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम और पुराने प्रश्न पत्रों  के आधार पर खुद के स्तर का मूल्यांकन कर लेना चाहिए ,फिर तैयारी के लिए मिलने वाला समय क्या आपके लिए पर्याप्त होगा ?क्या आप मैकानिकल इंजीनियरिंग के इतने बड़े पाठ्यक्रम और सिविल सेवा के अन्य सामान्य अध्ययन पत्रों की तैयारी मे सामंजस्य बना सकेंगे ?आदि आधारों पर  आपकी अपनी तैयारी पर भरोसा करके ही बुद्धिमता से निर्णय लेना चाहिए । नहीं तो अपने हिसाब से कोई अन्य विषय चुनने मे जरा भी संकोच नहीं करना चाहिए
h) लेखन कौशल का विकास  
मुख्य परीक्षा मे अंक दिलाने का प्रमुख साधन यही है इसके लिए आपको निरंतर अभ्यास करना चाहिए ।
आपके अभ्यास हेतु कुछ बिन्दु -
1 इसके लिए आपको पुराने प्रश्न पत्रों के उत्तर लेखन का अभ्यास करना चाहिए व निबंध लेखन भी करते रहना चाहिए
2 उत्तर प्रश्न के अनुसार ही होना चाहिए ,जो पूछी जा रही है ,हमे  अतिरिक्त चीजें नहीं लिखना चाहिए इसके लिए प्रश्न को दो से तीन बार पढ़कर अच्छी तरह समझ लेना चाहिए
3 उत्तर हमेशा तथ्य और तर्कों पर आधारित होना चाहिए न की भावनाओ पर
4 उत्तर लिखते समय पुनरावृति से बचना चाहिए
5 शब्द सीमा और समय सीमा का पालन करना चाहिए
6उत्तर सरल भाषा मे लिखना चाहिए
7 उत्तर मे क्रमबद्धता होनी चाहिए
8 लेखन सुस्पष्ट होना चाहिए 

i) निबंध लेखन अभ्यास 

सिविल सेवा परीक्षा मे निबंध भी  एक महत्वपूर्ण भाग है अन्य तैयारियों के साथ साथ इसका भी तैयारी करते रहना चाहिए और विभिन्न विषयों पर निरंतर निबंध लेखन का अभ्यास करना चाहिए जिससे आप मे लेखन कौशल मे वृद्धि ,विश्लेषण क्षमता का विकास ,विचारों और शब्दकोश मे वृद्धि आदि लाभ भी होंगे । 

j) साक्षात्कार की तैयारी

यह सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम और महत्वपूर्ण भाग है तैयारी की शुरुआत दिनो से ही इस पर भी उतना ही ध्यान देने की आवश्यकता है जितना की अन्य तैयारियों पर । 

k) शॉर्ट नोट्स  का निर्माण

विभिन्न विषयों की तैयारी के दौर मे जब आप किताबों को पढ़ रहे होते हैं तो महत्वपूर्ण बिन्दुओं को नोट करते चलना चाहिए और यदि आप सम्पूर्ण किताब का 3-4 पेज मे सारांश निर्माण मे सफल हो गए तो आपको दोबारा किताब खोलने का जरूरत नहीं पड़ेगा ,और शीघ्रता से पुनरावृति करने मे आसानी होगा । परीक्षा के दिनो मे ये नोट्स की आपके लिए सबसे जरूरी हथियार सिद्ध होंगे । 

l) किताबें एवं अध्ययन के अन्य स्रोत  

तैयारी के शुरुआती दौर मे ये कम से कम रखें और नया खरीदने से पहले ये सुनिश्चित करें की जो है उसको पूरा कर लिए हों , व्यर्थ के किताबों की अध्ययन से बचें , कम से कम स्रोत और विषय संबंधी अवधारनाओ की स्पष्टता को प्राथमिकता दें,किसी भी विषय मे  ज्यादा नए सामाग्री पढ़ने से अच्छा ,महत्वपूर्ण किताबों की पुनरावृति को महत्व दें । विषय की संपूर्णता सुनिश्चित कर लेने के पश्चात विवेकानुसार गुणवत्तापूर्ण नए सामग्रियों की सहायता ले सकते हैं ज्ञान संवर्धन हेतु । 

m) इंटरनेट , सॉफ्टवेर के उपयोग 

वर्तमान समय मे अपनी तैयारी को आधुनिकतम रूप देते हुए कुछ नए चीजों के बारे मे पढ़ने ,विषय संबंधी वीडियो ,वैबसाइट का अध्ययन ,समसमयिकी के अध्ययन हेतु इंटरनेट का सदुपयोग करना चाहिए परंतु समय की बर्बादी से बचना चाहिए evernote जैसे कुछ सॉफ्टवेयर का उपयोग भी किया जा सकता है । 
n) समय प्रबंधन
"बिता हुआ समय कभी वापस नहीं आता "
किसी भी परीक्षा मे सफलता प्राप्त करने हेतु समय प्रबंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । छोटे छोटे लक्ष्य निर्धारित कर समय प्रबंधन करते हुए लक्ष्य को प्राप्त करते हुए आगे बढ़ना चाहिए ,कार्य योजना बनाकर पढ़ना चाहिए ,चीजों को प्राथमिकता के आधार पर बाँट लेना चाहिए । 

o) तनाव और चिंता से मुक्त रहें 

संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा पूरे वर्ष भर चलता है अतः इस दौरान आपको तनाव और चिंता मुक्त रहना चाहिए ताकि तैयारी अच्छे से हो सके । तनाव से बचने के लिए आपको प्रभावी अध्ययन ,स्वास्थ्य जीवन शैली ,सही सूचना ,परीक्षा से पूर्व की तैयारी ,परीक्षा के समय की रणनीतियाँ आदि पर ध्यान देना चाहिए 

मेरी ओर से आपको आपकी तैयारी के लिए शुभकामनाए । 

साभार श्री अशोक कुमार ,IPS ,
श्री स्वप्निल तेम्बे IAS 










जाने IAS मे सफल होने की असली रणनीति Reviewed by Unknown on 5:14:00 AM Rating: 5

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